Monday, May 5, 2014

गेस्ट हाउस


गेस्ट हाउस और दफ्तर के ठीक बीचों-बीच है धीरज भैया की चाय की दूकान। धीरज भैया और ध्रुव की अच्छी मित्रता है। उनके पास बताने के लिए हर समय कोई न कोई किस्सा अवश्या होता है। कल वाले किस्से ने ध्रुव को विचलित कर दिया। किस्सा बताने से पहेले, गेस्टहाउस और उसके मालीक के परिवार का वर्णन करना ज़रूरी है। चार मंजिला आलिशान गेस्टहाउस के मालिक बहुत ही बुद्धिजीवि परिवारों में से एक मानें जाते है। मिस्टर गोडबोले अपने समय में जज थे और मीसिज़ गोडबोले डॉक्टर है। उनके दो बच्चे थे। एक लड़की और एक लड़का, उन दोनों ने ही डॉक्टर बनने की तालीम ली। अब हुआ यह की आज से आठ-नौ साल पहेले जब अनीता (गोडबोले फॅमिली की होनहार बेटी) ने म.बी.बी.स. की पढाई पूरी करली तब उसने अपने कॉलेज के एक टीचर 'डॉक्टर इमरान' से शादी करने का प्रस्ताव अपने घर पर रखा। माता-पिता को यह बात बिलकुल भी जमी नहीं। उन्होंने अपनी बेटी को दो बातें समझाने का प्रयतन किया। पहली, वो मुसलमान है। दूसरा वो एक बेहद गरीब घर से है। उनकी लड़की ना मानी तो उन्होंने दुसरे हथकंडे अपना लिए। लड़की को घर में बंद किया और इमरान को ना ना प्रकार की धमकियाँ दी। जब किसी भी तरह बात नहीं बनी तो उन्होंने कुछ विशेष करने का मन बना लिया। उन्होंने ने अपनी लड़की से कहा की वे शादी के लिए तैयार है और वे लड़के वालों से जल्द से जल्द मिलना चाहेंगे। अमुक अमुक दिनांक को लड़के के घर जाने की बात तय हो गयी। इमरान और अनीता बेहद खुश थे क्योंकि कुछ ही घंटों बाद दोनों परिवार मिलने वाले थे। जज साहब और डॉक्टर साहिबा लड़के वालो के लिए तोहफा लेने गए और बेटी को अपने छोटे भाई विजय के साथ इमरान के घर जाने को कहा। अनीता और विजय, इमरान के घर पहुँच गये। सब लोग बेसब्री से अनीता के माता-पिता का इंतज़ार कर रहे थे। वे दोनों तोहफा लेकर लड़के वालो के घर पहुंचे। तोहफा देखते ही सब लोग उठ खड़े हुए क्योंकि तोहफे के रूप में वे एक कुत्ता लाये थे। जिसको उनने इमरान के पिता के हाथ में यह कहते हुए थमा दिया "लीजिये हमारी तरफ से यह इमरान नाम का कुत्ता स्वीकार कीजिये"। अनीता अपने माता पिता की ये यह नीच हरकत को बर्दाश ना कर सकी और उसने आत्महत्या करली। डॉक्टर गोडबोले ने अपनी बेटी की आत्महत्या को खून का मामला सिद्ध करवा दिया और जज साहब ने इमरान को गिरफ्तार करवा दिया। 

*एक सच्ची घटना पर आधारित।